मेरा नाम विनय प्रजापति है और तख़ल्लुस नज़र है। बहुत साधारण जीवनशैली वाला सरल और सुलझा हुआ इंसान हूँ। लेकिन सरलता में भी एक अपनी एक कठिनाई है जो कि आपको मेरी कविताओं और ग़ज़लों में देखने मिलेगी। मैंने अपनी सम्पूर्ण शिक्षा (बी. टेक., इलेक्ट्रानिक्स एण्ड कम्यूनिकेशन) अपने जन्म स्थान लखनऊ से पूरी की है। यूँ तो कई तेज़ रफ़्तार और धीमे शहर देखे हैं लेकिन लखनऊ में जिस सुकून की प्राप्ति होती है उसका लुत्फ़ ही कुछ और है। उर्दू पुराने लखनऊ से जुड़े होने के कारण सदा ही ज़ुबाँ पर रही और शायरी का शौक ठीक से याद नहीं लेकिन १९९६ (1996) में ज़ुनून की हद पर था, बस तभी से यह उर्दू और हिन्दी काव्य की सममिश्रित गंगा बही जा रही है। आशा है कि आपको मेरा काव्य पसंद आयेगा।

सच्चे हृ्दय से ढेरों शुभकामनाएँ
विनय प्रजापति 'नज़र'



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